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श्री गोवर्धन गौशाला में बाल संत गोविन्द हाटकेश नागर ने दिए सत्संग : गुरू हमे रेलवे स्टेशन तक छोड़ता है और कथा हमें घर तक छोड़ती है- बाल संत नागर

Bakhtavar Express

Wed, Sep 3, 2025

बरमंडल । जिस प्रकार पत्नी ही पति को संतान देती है ठीक उसी प्रकार भगवान की कथा ही मनुष्य को सदबुद्धि देती है। प्रभु दर्शन से महत्वपूर्ण प्रभु की कथा है। कथा हमें वहां पहुंचा सकती है जहां हमें गुरू भी नहीं पहुंचा सकते है। भले भी हम धन से कुछ नहीं कर पाए पर तन और मन हमेशा कथा में ही रहना चाहिए। तन और मन कथा में रहेगा तो हमारा बेड़ा पार होना तय है। परमात्मा कहते है मै सबकुछ दे सकता हूं लेकिन सदबुद्धि तो कथा में ही मिलती है इसलिए जहां प्रभु की कथा मिले वहां जाकर बैठ जाओ वहां से ज्यादा आनंद सुख किसी स्थान पर नहीं हो सकता है। उक्त उदगार स्थानीय श्री गोवर्धन गौशाला में एक दिवसीय सत्संग में व्यासपीठ से बाल संत पंडित गोविन्द हाटकेश नागर ने गौभक्तों के समक्ष व्यक्त किए।

पंडित नागर ने कहा कि गुरू हमे रेलवे स्टेशन तक छोड़ता है और कथा हमें घर तक छोड़ती है। भजन किसी एक जाति के लिए या किसी एक जाति से नहीं होता है भजन तो श्रद्धा से होता है। लोग भले ही जातिवाद करे परन्तु परमात्मा , प्रभु जगन्नाथ , द्वारकाधीश की नजर में कोई जातिवाद नहीं है। यदि खुद अज्ञानी हो तो दूसरो को ज्ञान देने मत जाओ पहले खुद को सुधारो।मनुष्य कथा सुनने और साथ देने के लिए बना है। एक दूसरे के दुःख में सहायक हो , हमेशा एक दूसरे के साथ खड़ा रहे परंतु आज इंसान ही इंसान का सहायक नहीं होता है और जो मनुष्य दुःख में मनुष्य का साथ नहीं दे तो वो मनुष्य पशु से भी बदतर है उससे तो पशु अच्छा है।    एक दिवसीय सत्संग में पधारे बाल संत ने सबसे पहले गौशाला परिसर में विराजित श्री ऋण मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन वंदन किए तत्पश्चात गौशाला में गौमाता का पूजन अर्चन किया। व्यासपीठ पर विराजित बाल संत का गौशाला समिति द्वारा तिलक लगाकर दुपट्टा भेंट कर सम्मान किया गया। इस दौरान बरमंडल सहित आसपास से बड़ी संख्या में मातृशक्ति सहित गौभक्त मौजूद थे।


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