फर्ज निभाते शहीद हुए अपने लाल को नम आंखों से दी विदाई : देशभक्ति के नारो के साथ निकली अंतिम यात्रा, गार्ड आफ आनर के साथ दी विदाई,उमड़ा सेलाब
Bakhtavar Express
Mon, Nov 2, 2026

बरमंडल। बरमंडल की माटी मे कई ऐसे लाल पैदा हुए जिन्होंने इस गांव का नाम बुंलदियों और शोहरत पर पहुंचाने के लिए अपनी जी जान लगा दी। सोमवार का दिन बरमंडल के लिए दुखद था जब इस गांव का लाल अपना फर्ज निभाते हुए शहीद हो गया लेकिन उसने अपने उसूलों से समझौता नही किया। देवास जिले के खातेगांव मे शराब से भरे वाहन को चेकिंग के दौरान रोकने के बाद जिस तरह उनकी मौत हुए उससे हर कोई आक्रोश मे था। गांव मे अलसुबह जैसे ही टीआई दिलीप पुरी के निधन की दुखद खबर मिली हर कोई स्तब्ध रह गया चारो और सन्नाटा पसरा हुआ था। बस जुबान पर थे तो अपने इस लाल की बहादुरी के किस्से थे। सदर बाजार स्थित उनके पैतृक निवास के बाहर सुबह से ही भीड़ जुटना आरंभ हो गई थी। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी गांव पहुंचने लगे और परिवार को ढांढस बंधाते रहे। लेकिन सभी से बस एक ही प्रश्न था इसकी निष्पक्ष जांच हो दोषी कितना भी बडा क्यो ना हो बख्शा नही जाए।

गांव मे पार्थिव देह पहुँचते ही देशभक्ति के नारो से गूंजा आकाशः-
दोपहर मे करीब 4 बजकर 20 मिनट पर टीआई दिलीप कुमार पुरी का पार्थिव शरीर सोमवार को तिरंगे में लपेटकर उनके पैतृक गांव लाया गया। शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शराब से भरे ट्रक से कुचलकर उनकी मौत के बाद से ही परिवार और गांव के लोग सदमे में थे। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, पूरे गांव में शोक की लहर छा गई। पत्नी, बेटी, पिता,माँ बहन सहित परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अपने प्रियजन को तिरंगे में लिपटा देखकर परिजन बिलख पड़े। घर पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन हो गया।
कमिश्नर आईजी सहित आला अधिकारी पहुॅचे:-
इस दुख की घड़ी में इंदौर आईजी अनुराग, कमिश्नर भास्कर लक्षाकार, सहित पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी बरमंडल पहुंचे। अधिकारियों ने टीआई के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया।इंदौर आईजी अनुराग ने कहा कि दिलीप कुमार पुरी पुलिस परिवार के बहादुर और होनहार सदस्य थे। उनकी मौत से पूरा पुलिस परिवार दुखी है। इस दुख और संकट की घड़ी में पुलिस विभाग पूरी तरह उनके परिवार के साथ खड़ा है। आईजी ने बताया कि पूरे मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं।इस दौरान परिजनों ने आईजी और कमिश्नर के सामने अपनी मांगें रखीं। उन्होंने दिलीप पुरी की पत्नी को शासकीय अनुकंपा नियुक्ति देने, घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। परिजनों ने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते हुए न्याय की मांग की। और बताया की बच्चो की शिक्षा को देखते हुए पत्नि को जो अनुकंपा नियुक्ति मिले उन्हे इंदौर मे ही पदस्थ किया जाए और फील्ड की जगह ऑफिस मे पदस्थ किया जाए।

प्रशासन,पुलिस और जनप्रतिनिधि सहित ग्रामीणो ने दी श्रद्धांजलि-
निवास के बहार तिरंगे मे लपेटी हुए उनकी पार्थिव देह को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। जिसमे आईजी अनुराग,कमिश्नर भास्कर लक्षाकार,कलेक्टर राजीव रंजन मीना,एसपी सचिन शर्मा,पुर्व देवास एसपी पुनीत गहलोत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारूल बेलापुरूकर विधायक प्रताप ग्रेवाल,एसडीएम अजमेर सिंह गौड़,तहसीलदार महेश सोंलकी,एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार, नायब तहसीलदार प्रशस्ति सिंह जमरे , नायब तहसीलदार अनिल बघेल,टीआई नेवल सिंह बर्डे,टीआई समीर पाटीदार,टीआई राजु मकवाना,टीआई रणजीत सिंह बघेल सहित बडी संख्या मे टीआई और प्रशासनिक अधिकारीयो ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वही 1008 महा मंडलेश्वर श्री आनंद गिरी जी महाराज,भाजपा अजजा मोर्चे के जिला अध्यक्ष सुनिल वसुनिया,जिला पंचायत सदस्य सुनिल गामड, भाजपा जिला मंत्री जमुना भूरिया,कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र सिंह राठौर,रघुनंदन शर्मा सहित बडी संख्या मे ग्रामीणों ने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

गार्ड आॅफ आनर के साथ दी विदाई-
इसके बाद तिरंगे में लिपटे टीआई दिलीप कुमार पुरी के पार्थिव शरीर को सुसज्जित रथ में रखकर समाधि स्थल तक लाया गया। गांव में अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण, पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और परिजन शामिल हुए। इस दौरान देशभक्ति गीत बजाए गए और पूरे रास्ते लोग नम आंखों से अपने गांव के वीर सपूत को अंतिम विदाई देते नजर आए।समाधि स्थल पर पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ आनर दिया और हवाई फायर कर सलामी दी। इसके बाद पूरे विधि-विधान और राजकीय सम्मान के साथ टीआई दिलीप कुमार पुरी को समाधि दी गई। अंतिम विदाई के दौरान पत्नी, बेटी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं। जिस गांव में दिलीप पुरी का बचपन बीता, उसी गांव में उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस घटना से पूरे बरमंडल गांव में शोक का माहौल है। लाबरिया दसाई मार्ग स्थित पैतृक शंकर मठ मे संत दशनाम गोस्वामी समाज की पंरपंरा अनुसार उन्हें समाधी दी गई।
शासकीय विद्यालय का नाम स्वर्गीय टीआई के नाम करने की घोषणा:-
अंतिम यात्रा मे शासन की और से राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र शिवाजी पटेल भी शामिल हुए उन्होने शासन की और से श्रद्धांजलि अर्पित की। वही ग्रामीणों ने उन्हे मांग पत्र सौंपते हुए घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग के साथ गांव के शासकीय विद्यालय का नाम स्वर्गीय टीआई दिलीप पुरी के नाम पर करने की मांग की । जिस पर मंत्री ने कलेक्टर से इस पर जल्द कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
जीवन परिचय -
रविवार की मध्य रात्रि मे देवास जिले के खातेगांव मे फर्ज निभाते शहीद हुए बरमंडल के लाल टीआई दिलीप पुरी की गिनती काबिल पुलिस अफसरो मे होती थी। अपने फर्ज के प्रति सदैव सजग रहने वाले दिलीप पुरी मध्यम वर्गीय परिवार से थे। 21 सितबंर 1981 को सदर बाजार बरमंडल मे ओम प्रकाश पुरी के यहा पर जन्म लेने वाले टीआई दिलीप पुरी पढाई मे तेज थे। गांव के शाउमावि बरमंडल से ही वर्ष 1997 मे हायर सेकेंडरी की पढाई पुरी करने के बाद धार के पीजी कालेज से बीएएससी और एमएससी मैथ्स से पढाई करने के बाद वर्ष 1996-97 मे गांव मे ही सरस्वती शिशु मंदिर मे बतौर आचार्य के तौर पर विद्यार्थीयो को पढाया। उसके बाद 2002-2003 मे शाउमावि बरमंडल जहा पर उन्होने शिक्षा ग्रहण की वहा पर अतिथी शिक्षक के तौर पर बच्चो को पढाया। उसके बाद राजोद के सुराज कान्वेट स्कुल मे 2005-2006 के शिक्षक के तौर पर पढाया। वर्ष 2003 मे बदनावर तहसील के गांव बखतपुरा मे माध्यमिक शिक्षक के पद पर चयन हुआ। जहा से पुलिस उपनिरीक्षक की वेकेसी निकलने पर आवेदन किया कठोर तैयारी कर लिखीत और शारीरीक परिक्षा पास कर चयनित हुए। 2006-2007 मे जबलपुर जिले मे प्रथम नियुक्ति हुए।
अलीराजपुर जिले मे चांदपुर,सौडवा,सौरवा,उदयगढ मे थाना प्रभारी का पदभार संभाला।
उसके बाद बालाघाट मे प्रषिक्षण अवधि पुर्ण करने के बाद प्रमोषन निरीक्षक के तौर पर हुआ। उसके बाद सतना मे रामनगर और अमरपाटन थाने की कमान संभाली। इंदौर मे आजादनगर ,महुॅ,चंदननगर,हीरानगर थाने की कमान संभाली। खंडवा मे छैगावं माखन कोतवाली थाने की कमान संभाली। बडवानी मे राजपुर,जुलवानिया, और संेंधवा की कमान संभाली। देवास मे कुछ माह पुर्व ही सतवास और वर्तमान मे खातेगांव थाने की कमान संभाली थी।
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