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साहित्य में सकारात्मकता व समाधान दोनो होना चाहिए : इंदौर प्रेस क्लब में हुआ डॉ अर्चना त्रिवेदी की प्रथम काव्य कृति अंतर्निहित का लोकार्पण

Bakhtavar Express

Sun, Sep 7, 2025

इंदौर। डॉ अर्चना त्रिवेदी की प्रथम काव्य कृति अंतर्निहित का लोकार्पण प्रेस क्लब इंदौर में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ विकास दवे , कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ पद्मा सिंह, साहित्य मंत्री श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति , विशेष अतिथि एवं चर्चाकार डाॅ पुष्पेन्द्र दुबे,शोध मंत्री श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, वरिष्ठ अभिभाषक व गांधीवाद विचारक श्री अनिल त्रिवेदी की गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत भाषण अतुल त्रिवेदी द्वारा किया गया, अतिथि परिचय डॉ श्वेता ,वंदना उपाध्याय,, एवं प्रतिक-प्रवर श्रोत्रिय द्वारा किया गया।

इस अवसर पर वरिष्ठ मातृशक्ति श्रीमती कृष्णा श्रोत्रिय, श्रीमती आशा पुरोहित, श्रीमती कृष्णा शर्मा, श्रीमती किरण शर्मा का सम्मान किया गया।श्री विनायक प्रकाशन के प्रकाशक श्री मुकेश‌ इंदौरी का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि डॉ विकास दवे ने अपने उद्बोधन में कहा कि

साहित्य अकादमी ऐसे नवोदित रचनाकारों को सामने ला रहे है ,जो नेपथ्य में रहकर काम कर रहे थे , जिन्होंने स्वांतः सुखाय" परिस्थितिवश व पारिवारिक संघर्षों से निकलकर के कलम को थामा।

आपने कहा

साहित्य समाज का दर्पण है पर दुर्भाग्य से साहित्य के नाम पर जो विकृतियां परोसी जा रही है।वह चिंतनीय है । साहित्य जगत में नकारात्मकता की चर्चा सकारात्मकता व समाधान के साथ करना चाहिए।आपने

जीवन में पांच' स्व' के 'बोध ' को जागृत करने पर केन्द्रित किया, भाषा, भूषा , भवन‌ ,सात्विक भोजन‌ व भजन में 'स्व 'का बोध होना चाहिए। वर्तमान में जीवन मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है जो मानस जैसे

ग्रंथों से प्राप्त होते हैं।हम इसे लपेट कर सहेज कर रख देते हैं, बल्कि इसे नित्य पढ़कर इसके मूल्यों को जीवन में उतारे। क्यों कि मानस में हर समस्या का समाधान अंकित है।

विशेष अतिथि एवं चर्चाकार डाॅ पुष्पेन्द्र दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य समाज से जुड़ रहा है ये अच्छी शुरुआत है।मन पर केन्द्रित, काव्यसंग्रह में सहज,सरल भावों में लिखित रचनाओं का संक्षेप में उल्लेख किया व कहा कि

समाज जिन समस्याओं से जूझ रहा है उसको उन कविताओं में खोजा जा सकता है। आपने बच्चों में लुप्त हो रहे बालपन की अठखेलियों की भी चर्चा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ पद्मा सिंह ने कहा कि लेखन सार्थक व उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए।लेखन में शब्दों से दोस्ती करना ही बहुत बड़ी बात है। कविता शब्दों का संगीत नहीं, आत्मा का नाद है। सभी के पास भाव है,तो अभिव्यक्ति का गुण भी आ ही जाता है। आपने कहा हम स्त्री के संघर्षों की हमेशा बात करते हैं लेकिन पुरुष हृदय में भी ममता होती है। इसलिए सबका अपना अपना विशिष्ट स्थान है।

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ अभिभाषक अनिल त्रिवेदी का मर्मस्पर्शी उद्बोधन रहा, आपने अपनी मीठी मालवी भाषा को प्राथमिकता देते हुए कहा कि वर्तमान समय में लोगों ने व्यस्तता के तहत मिलना जुलना बंद कर दिया, तड़क भड़क में सादगी भूल गये।संप्रेषण भी कम हो गया।नयी पीढ़ी को अध्ययन करने का संदेश दिया क्योंकि अध्ययन से चिंतन व नई ऊर्जा मिलती है। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ दीपक शर्मा द्वारा किया गया।

श्रीमती मंगला शर्मा ने आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में शहर के साहित्यकार ,चिकित्सक, व्यवसायी व शिक्षाविद उपस्थित थे।

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