ब्रेकिंग

कल निकलेगी भगवान राजराजेश्वर की राजसी सवारी,प्रजा का हाल जानने राजसी ठाट बाठ से करेंगे भ्रमण

मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत शिविर का हुआ आयोजन,एसडीएम ओर एसडीओपी ने सुनी समस्या

31 उपवास की तपस्या अनुमोदनार्थ कार्यकर्म संपन्न,वरघोड़ा निकाला

रक्षाबंधन पूर्णिमा पर मंत्रोच्चार से धारण किया नवीन यज्ञोपवीत

रक्षाबंधन पर सब जेल सरदारपुर की अनूठी पहल , “एक बंदी एक पेड़” अभियान के तहत बहनों को दिए पौधे

सूचना

राजगढ़ नगर परिषद ओबीसी आरक्षण पर चुनाव जीतने के आरोपों पर सुनवाई : फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में परिवाद खारिज, अदालत ने नहीं पाया प्रथम दृष्टया आधार

Bakhtavar Express

Mon, Apr 13, 2026

सरदारपुर। राजगढ नगर परिषद चुनाव से जुड़े कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए परिवादी द्वारा दायर परिवाद को खारिज कर दिया है। नगर परिषद अध्यक्ष सवेरा महेश जायसवाल के अधिवक्ता दिनेश बैरागी ने बताया कि न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया किसी भी आपराधिक धाराओं के तहत संज्ञान लेने के पर्याप्त आधार नहीं पाए।

मामले में परिवादी अंजली अजय जायसवाल की ओर से अधिवक्ता डी.एस. चौहान उपस्थित हुए, जबकि अभियुक्त नगर परिषद अध्यक्ष सवेरा महेश जायसवाल की ओर से अधिवक्ता दिनेश बैरागी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान प्रकरण पंजीयन एवं आवेदन पर विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए गए। अभियुक्त पक्ष ने यह भी आवेदन दिया कि परिवाद दर्ज करने के पर्याप्त आधार नहीं हैं, जिस पर अदालत ने अलग से आदेश देने के बजाय मुख्य प्रकरण पर ही निर्णय दिया।

परिवादी अंजली जायसवाल ने आरोप लगाया था कि सवेरा जायसवाल ने नगर परिषद चुनाव 2022-23 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुई। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में संबंधित प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया।

परिवादी पक्ष ने अपने समर्थन में स्वयं अंजली जायसवाल सहित अजय जायसवाल और जाति प्रमाण पत्र शाखा प्रभारी हेमंत खलिया के बयान प्रस्तुत किए। साक्षियों के अनुसार प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड शासकीय अभिलेखों में नहीं मिला और उसमें कई विसंगतियां पाई गईं।

हालांकि, न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल मौखिक साक्ष्य या प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी जाति प्रमाण पत्र को फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी या राज्य स्तरीय जाति सत्यापन समिति द्वारा विधिवत जांच आवश्यक होती है।

अदालत ने यह भी पाया कि परिवादी द्वारा ऐसी किसी सक्षम समिति में शिकायत या उसकी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। साथ ही, धोखाधड़ी (धारा 420 भादंवि) के लिए आवश्यक तत्व भी साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं हुए।

अधिवक्ता दिनेश बैरागी ने सभी तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471 के अंतर्गत संज्ञान लेने से इंकार करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 203 के तहत परिवाद को निराधार मानकर खारिज कर दिया। उक्त जानकारी विष्णु चौधरी ने दी।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें