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: भगवान भले ही ज्ञान और कर्म से न मिलें भक्ति से अवश्य मिलते है.. पं. राम अवतार महाराज

Admin

Sun, Apr 30, 2023

राजोद।।भगवान कृष्ण ने गिरिराज पर्वत उठाया इसलिए उनका नाम गिरधारी पडा।गोपी का अर्थ है इंद्रियों को पीना।यमुना भक्ति की प्रतीक है।गोपी गीत जो निरंतर भजता है उसे एक बार  जीवन मे गोविंद का दर्शन जरूर होता है। भगवान भले ही ज्ञान और कर्म से न मिले पर भक्ति से अवश्य मिलते हैं उक्त उद्गगार रामबोला धाम मंदिर पर चल रही कथा के छठे दिन पं. राम अवतार  महाराज अयोध्या पुरी ने कहे ।

गोपियाँ ने कृष्णजी  से  सदैव दर्शन की ही लालसा की है। गोपियों पर वृतांत सुनाया। भागवत कथामृत पान करने  वाले सभी भक्तों के सारे पाप संताप,और ताप सब मिट जाते है। भगवान की कथा जो सुन लेता है उसके सुनने से जीवन मे मंगल ही मंगल होता है साथ ही लक्ष्मी जी की  भी कृपा प्राप्त होती है।

प्रभु की कृपा है किसे कब कहा बिठाना है। अनित्य धन भौतिक सम्पदा नश्वर है पर प्रभु नाम ही नित्य धन है जो कभी नष्ट नहीं होता।रास रचो है -भजन गीत पर झूम उठा पांडाल,सम्राट परीक्षित ने कहा की भगवान धर्म की स्थापना के लिए आते हैं। हम सभी बंधन में हैं  पर परमात्मा किसी के बधंन मे नहीं है ।पं. राम अवतारजी ने कहा कि यह काम लीला नही श्याम लीला है। बडे बडे संत महात्मा गोपी बने है। शुकदेव भगवान कहते भक्ति मार्ग  का सबसे बडा शत्रु काम है ।जीव और परमात्मा का मिलन ही महारास है। कृष्ण की बाल लीलाओं व मामा कंस वध सुंदर प्रसंग सुनाया।

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