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: रुखमणि हरण स्थल के रूप मे है विख्यात अमका झमका माता मंदिर, नवरात्रि पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते भक्त

Admin

Wed, Mar 22, 2023

भक्तो की मनोकामना होती है दरबार मे पुरी,बड़ी संख्या मे पहुंचते है भक्त


अभिजीत पंडित।
धार जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर मांगोद मनावर मार्ग पर ग्राम अमझेरा मे प्राकृतिक सुंदरता से अच्छादित अति प्राचीन अमका झमका माता मंदिर स्थित है। बताया जाता है कि द्वापर युग मे भगवान श्री कृष्ण ने इसी मंदिर मे आकर रुखमणि का हरण कर अपने साथ रथ मे बिठाकर द्वारिका ले गए थे। अम्बिका माता मंदिर के पिछे पहाड़ी पर आज भी रथ के पहियो के निशान मौजूद है। परिसर मे हि चामुंडा माता, भैरव जी, ओघड बाबा के मंदिर एवं प्राचीन कुण्ड स्थित है। तिर्थ क्षेत्र मे हि अति प्राचीन बैजनाथ महादेव एवं राज राजेश्वर एवं झमका माता का मंदिर पहाड़ो मे स्थित है। पूरे वर्ष पहाड़ो से गिरते जल से भोलेनाथ का स्वत हि जलाभिषेक होता है। बताया जाता है कि अज्ञात वास के समय पांडव भी यहां आकर रुके थे।
भक्तो कि मनोकामना होती है पुरी
अमका झमका माता के मंदिर मे पहुंचने वाले हर भक्त कि मनोकामना पुरी होती है। माता मंदिर के पिछे भक्त अपनी मनोकामना के लिए उल्टा स्वस्तिक गाय के गोबर एवं कुमकुम से बनाते है मनोकामना पुरी होने के बाद माता मंदिर मे पहुंचकर मन्नत उतार कर स्वस्तिक को सिधा बनाया जाता है। यहां निसंतान दम्पत्ति, व्यापार, नौकरी, विवाह सहित कई मनोकामना के लिए बड़ी संख्या मे भक्त पहुंचते है। मंदिर के पुजारी दिनेश पंडित बताते है कि महाराष्ट्र, गुजरात सहित मालवा निमाड़ के भक्तो कि कुलदेवी होने से नवरात्रि मे नो दिनों तक भक्त पहुंचते है। नवरात्रि मे विशेष पूजन अभिषेक किया जाता है। साथ हि महाष्टमी एवं नवमी को मंदिर मे यज्ञ का आयोजन भी पंडितो के द्वारा किया जाता है।

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